परमेश्वर का संविधान।

गरीब, राम कहा तो क्या हुआ, उर में नहीं यकीन।
         चोर मुसें घर लूटहि, पाँच पचीसों तीन।।18।।

भावार्थ :- यदि साधक को परमात्मा पर विश्वास ही नहीं है तो नाम-सुमरण का कोई लाभ नहीं। उसके मानव जीवन को काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार रूपी पाँच चोर मुस (चुरा) रहे हैं। इन पाँचों की पाँच-पाँच प्रकृति यानि 25 ये तथा रजगुण के आधीन होकर
कोठी-बंगले बनाने में, कभी कार-गाड़ी खरीदने में जीवन नष्ट कर देता है। सतगुण के प्रभाव
से पहले तो किसी पर दया करके बिना सोचे-समझे लाखों रूपये खर्च कर देता है। फिर
उसमें त्राटि देखकर तमोगुण के प्रभाव से झगड़ा कर लेता है। इस प्रकार तीन गुणों के प्रभाव
से मानव जीवन नष्ट हो जाता है।

यदि तत्त्वदर्शी संत से ज्ञान सुनकर विश्वास के साथ नाम
का जाप करे तो जीवन सफल हो जाता है।

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