Posts

कबीर परमेश्वर के चमत्कार।

Image
काशी में भोजन-भण्डारा करना। शेखतकी सब मुसलमानों का मुख्य पीर (गुरू) था जो परमात्मा कबीर जी से पहले से ही खार खाए था अर्थात् पहले से ही ईर्ष्या करता था। सर्व ब्राह्मणों तथा मुल्ला-काजियों व शेखतकी ने मजलिस करके षड़यंत्र के तहत योजना बनाई कि कबीर निर्धनव्यक्ति है। इसके नाम से पत्र भेज दो कि कबीर जी काशी में बहुत बड़े सेठ हैं। उनका पूरा पता है कबीर पुत्र नूरअली अंसारी, जुलाहों वाली कॉलोनी, काशी शहर। कबीर जी तीन दिन का धर्म भोजन-भण्डारा करेंगे। सर्व साधु संत आमंत्रित हैं। प्रतिदिन प्रत्येक भोजन करने वाले को एक दोहर (जो उस समय का सबसे कीमती कम्बल के स्थान पर माना जाता था), एक मोहर (10 ग्राम स्वर्ण से बनी गोलाकार की मोहर) दक्षिणा में देगें। प्रतिदिन जो जितनी बार भी भोजन करेगा, कबीर उसको उतनी बार ही दोहर तथा मोहर दान करेगा। भोजन में लड्डू, जलेबी, हलवा, खीर, दही बड़े, माल पूडे़, रसगुल्ले आदि-2 सब मिष्ठान खाने को मिलेंगे। सुखा सीधा (आटा, चावल, दाल आदि सूखे जो बिना पकाए हुए, घी-बूरा) भी दिया जाएगा। एक पत्र शेखतकी ने अपने नाम तथा दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी के नाम भी भिजवाया। निश्चित दि...

Saint Rampal Ji Maharaj's contribution in social reform

Image
संत रामपाल जी महाराज जो ज्ञान बता रहे हैं एवं जो भक्ति विधि मानव समाज को प्रदान कर रहे हैं उससे अपने आप समाज सुधार हो रहा है। आइए जानते हैं। संत रामपाल जी महाराज का समाज सुधार में क्या-क्या योगदान है? संत रामपाल जी महाराज का नारा है।              जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।       हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।। 1 संत रामपाल जी महाराज मानव समाज को शास्त्र अनुकूल भक्ति विधि प्रदान कर रहे हैं जिससे पाखंडवाद अपने आप समाज से खत्म होता जा रहा है। 2 संत रामपाल जी महाराज से दीक्षा लेने के उपरांत व्यक्ति नशा करना तो दूर उसको हाथ तक नहीं लगाता है। इससे नशा रूपी बुराई समाज से खत्म हो रही है। 3 दहेज प्रथा को पूर्ण रूप से समाप्त कर रहे हैं संत रामपाल जी महाराज। क्योंकि उनके शिष्य ना दहेज लेते हैं ना देते हैं। 4 संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य चाहे कितनी ही उच्च पद पर हो ना तो रिश्वत लेते हैं ना ही देते हैं। जिससे भ्रष्टाचार रूपी राक्षस समाज से अपने आप ही धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा ...

भारत का पुनरुत्थान

Image
परमात्मा, आत्मा तथा मानवता। आत्मा की उत्पत्ति परमात्मा ने की। आत्मा तथा परमात्मा का नाता पुत्रा तथा पिता का है। आत्मा अपनी गलती से अपने पिता से बिछुड़ कर काल ब्रह्म के साथ यहाँ काल लोक में आ गई। यहाँ आने के पश्चात् काल ब्रह्म ने इसको विकार ग्रस्त कर दिया तथा त्रिगुण माया के द्वारा इसकी अन्तकरण वाली चेतना समाप्त कर दी तथा इसको जीव संज्ञा दे दी। जिस भी प्राणी के शरीर में यह आत्मा जाती है। उसी के अवगुण तथा गुण से प्रेरित रहती है। यह अपना मूल स्थान मूल मालिक (पिता) भूल चुकी है। यहाँ काल ब्रह्म के लोक में जन्म-मरण के चक्र में कष्ट पर कष्ट उठा रही है। इस आत्मा को इस महाकष्ट से बचाने के लिए तथा पुनः उसी स्थान पर ले जाने के लिए स्वयं परमात्मा आते हैं। जब यह आत्मा मानव शरीर प्राप्त करती है। केवल उसी समय इसका उद्धार हो सकता है। परंतु यथार्थ ज्ञान तथा भक्ति विधि यथार्थ न होने के कारण मानव शरीर धारी आत्मा भक्ति से होने वाले लाभ प्राप्त नहीं कर पाती। जिस कारण से भक्ति कम विकार अधिक करने लग जाते हैं। आत्मा के उद्धार के लिए प्रथम समाज सुधार की अति आवश्यकता है क्योंकि समाज में फैली...

बीमारी के कारण और इलाज।

Image
बीमारी की वर्तमान स्थिति -वर्तमान समय में बीमारियों की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। मेडिकल साइंस के लाखों प्रयासों के बाद भी हर साल कोई ना कोई बीमारी आती है। और जहां तक संभव होता है साइंटिस्ट इसका इलाज ढूंढने की व वैक्सीन बनाने की पूरी कोशिश करते हैं कुछ बीमारियां असंक्रमित होती हैं तथा कुछ संक्रमित होती है  संक्रमित बीमारियां ज्यादा घातक है जबकि असंक्रमित बीमारियां कहीं तक राहत  जनक है। डॉक्टरों के बहुत ज्यादा प्रयास के बाद भी कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिनकी अभी तक वैक्सीनिया दवा नहीं बन सकी है। वर्तमान समय में मेडिकल साइंस में बहुत तरक्की कर ली है जिसके बावजूद बहुत सी बीमारियां ऐसी हैं जिन का इलाज मेडिकल साइंस के पास भी नहीं है। इन बीमारियों के इलाज के लिए लोगों ने खुद को कई स्तर तक सुधार लिया है। वी खुद भी घरेलू उपचार की सहायता से कथा मेडिकल साइंस की सहायता से बीमारियों का इलाज खोजने का प्रयास करते हैं तथा कुछ मेडिकल संस्थाएं भी इस कार्य के लिए बहुत प्रयास कर रही है। कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिनका इलाज ना तो मेडिकल साइंस और नाही इन संस्थाओं के पास है कभी-कभी डॉक्टर्स भी...

परमेश्वर का संविधान।

Image
गरीब, राम कहा तो क्या हुआ, उर में नहीं यकीन।          चोर मुसें घर लूटहि, पाँच पचीसों तीन।।18।। भावार्थ :- यदि साधक को परमात्मा पर विश्वास ही नहीं है तो नाम-सुमरण का कोई लाभ नहीं। उसके मानव जीवन को काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार रूपी पाँच चोर मुस (चुरा) रहे हैं। इन पाँचों की पाँच-पाँच प्रकृति यानि 25 ये तथा रजगुण के आधीन होकर कोठी-बंगले बनाने में, कभी कार-गाड़ी खरीदने में जीवन नष्ट कर देता है। सतगुण के प्रभाव से पहले तो किसी पर दया करके बिना सोचे-समझे लाखों रूपये खर्च कर देता है। फिर उसमें त्राटि देखकर तमोगुण के प्रभाव से झगड़ा कर लेता है। इस प्रकार तीन गुणों के प्रभाव से मानव जीवन नष्ट हो जाता है। यदि तत्त्वदर्शी संत से ज्ञान सुनकर विश्वास के साथ नाम का जाप करे तो जीवन सफल हो जाता है।

तप करने से क्या लाभ है?

Image
तपस्या से क्या लाभ होता है, आओ जानें :-  गरीब, तप से राज, राज मध्य मानम्।  जन्म तीसरे शुकर श्वानम्।। भावार्थ :- तप से राज्य की प्राप्ति होती है यानि राजा बनता है। राजा में अहंकार अधिक होता है। अहंकार के कारण अनेकों पाप कर डालता है। फिर अगले जन्म में शुकर (सूअर) तथा श्वान (कुत्ता) बनता है। पहला मनुष्य जीवन शास्त्रा विरूद्ध साधना (तप) करके नष्ट किया। दूसरा जीवन राज करके खो दिया।  शास्त्रों में प्रमाण है :- ‘‘तपेश्वरी सो राजेश्वरी, राजेश्वरी सो नरकेश्वरी’’ भावार्थ :- जितना अधिक समय तक तप करेगा, वह (‘तपेश्वर’ यानि तपस्वियों में श्रेष्ठ माना जाता है) उतना ही अधिक समय तक राज्य करेगा। (राजेश्वरी का अर्थ है राजाओं में श्रेष्ठ है यानि लम्बे समय तक तथा विशाल साम्राज्य पर राज्य करेगा) जो जितने अधिक समय तक तथा विशाल क्षेत्रा पर राज्य करेगा, वह उतने अधिक पाप का भागी होगा।